अग्नि पुराण
अग्निदेव और महर्षि वसिष्ठ के दिव्य संवाद के रूप में संकलित यह अग्नि-पुराण तीस अध्यायों में सम्पूर्ण भारतीय ज्ञान-परम्परा का सार प्रस्तुत करता है। विष्णु के दशावतारों की लीलाओं से प्रारम्भ होकर तीर्थ-माहात्म्य, वास्तुशास्त्र, मूर्ति-प्रतिष्ठा, नित्य पूजा-विधि, स्नान-दान-व्रत, मन्त्र-शास्त्र, ज्योतिष-मुहूर्त, आयुर्वेद और रोग-चिकित्सा, वृक्ष-गज-अश्व शास्त्र, धनुर्वेद और दिव्यास्त्र, राजधर्म-नीतिशास्त्र-दण्डविधान, वर्णाश्रम-संस्कार, श्राद्ध-कर्म, प्रायश्चित्त, व्याकरण-छन्द-अलङ्कार, संगीत-नृत्य-कला, अष्टांग-योग, वेदान्त और ब्रह्म-ज्ञान, और अन्ततः सृष्टि-प्रलय के विशाल कालचक्र — सब कुछ इसमें समाहित है। यह केवल पुराण नहीं — मनुष्य-जीवन के हर पक्ष पर मार्गदर्शन देने वाला विश्वकोश है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना युगों पूर्व था।
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